
मई में इंग्लैण्ड की सरजमी पर वर्ल्डकप होना है जहाँ बाल हवा में तैरेगी और इस प्रकार की स्थिति बल्लेबाजों के लिये परेशानी खड़ा करती है । इस स्थिति को अगर भारतीय बल्लेबाजों के नजरिये से देखा जाए तो सलामी बल्लेबाजों में रोहित-धवन की जोड़ी लगभग तय है ।अगर पिच सपाट हुआ तो विश्व क्रिकेट में रोहित से बड़ा बैट्समैन देखने को नहीं मिलेगा लेकिन जहाँ पर गेंद कुछ हरकत करती है वहां रोहित को थोड़ा लड़खड़ाते देखा गया है और इंग्लैण्ड में पूरी उम्मीद है कि गेंद हवा में लहरायेगी फिर पूरी जिम्मेदारी विराट कोहली के कंधों में आ जाती है । विराट कोहली किसी दिन नहीं चले तो धोनी में वो क्षमता है कि वो मैच को फिनिश कर सकते हैं और हाल ही में धोनी ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीनों मैच में अर्धशतक जड़ कर ये साबित भी किया है। 2 महीने बाद वापसी करते हुए महेंद्र सिंह धोनी ने अपनी पुरानी झलक फिर प्रस्तुत किया । इस सीरीज में उन्होंने 193 की औसत से कुल 193 रन बनाए जिनमे दो बार नाबाद रहे और अपने आलोचकों को एक संदेश दिया की मैं 37 के उम्र में भी गेम फिनिश कर सकता हूँ । महेंद्र सिंह धोनी जिस तरह चेन्नई सुपर किंग्स को 2 साल के निलंबन के बाद विजेता बनाया उसी प्रकार उनमे भारतीय टीम को एक बार फिर विश्वकप जिताने का दम रखते हैं विकेट के पीछे कीपिंग में उनकी काबिलियत पर किसी को शक नहीं है वो जिस तेजी के साथ गिल्लियां उड़ाने में सक्षम है टूजी ,थ्रीजी,फोरजी, से भी आगे हैं । विकेट के बीच में दौड़ में वो हार्दिक पंड्या जैसे युवा खिलाड़ी को मात देते हैं ।अभी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हालिया सीरीज में उन्होंने 73% रन दौड़ कर बनाये हैं आप इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि 37 के उम्र में फिटनेस किस लेवल की है । आखिरी ओवर में धोनी की हीटिंग क्षमता लाजवाब होती है वो यार्कर बाल में भी बाउंड्री लगा लेते हैं । धोनी का रनों को पीछा करते हुए औसत विश्व क्रिकेट में सबसे ज्यादा है करीब 100+ लम्बे समय तक कप्तान रह चुके धोनी समय समय पर कोहली का क्षेत्ररक्षण सजाने में मदद करते रहते हैं और उसका परिणाम बढ़िया ही आता है। इन सब चीजों की जरुरत वर्ल्ड कप में पड़ेगा और कोहली पहली बार वर्ल्ड कप के लिए कप्तान है ऐसे में धोनी उसके लिए एक सहयोगी साबित होंगे।
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